राहुल ने चुनी पुश्तैनी सीट: फिरोज गांधी से शुरू हुआ सफर, इंदिरा यहीं से बनीं PM, सोनिया 20 साल रहीं सांसद

राहुल ने चुनी पुश्तैनी सीट: फिरोज गांधी से शुरू हुआ सफर, इंदिरा यहीं से बनीं PM, सोनिया 20 साल रहीं सांसद

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी की सीट छोड़कर रायबरेली लोकसभा सीट से नामांकन भरने का निर्णय लिया है। यह सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है और 1952 से गांधी परिवार का राजनीति में गहरा संबंध रहा है। यह कांग्रेस के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है, जब राहुल गांधी अपनी मां सोनिया गांधी की विरासत को रायबरेली से संभालने जा रहे हैं।

 

 

 गांधी परिवार का रायबरेली से गहरा संबंध

गांधी परिवार का रायबरेली से गहरा संबंध है, क्योंकि यह कांग्रेस की पैतृक सीट रही है। सबसे पहले 1952 में फिरोज गांधी ने इस सीट पर चुनाव लड़ा और जीता। उन्होंने 1957 में भी इस सीट से जीत हासिल की। उनके निधन के बाद, 1967 के चुनाव में इंदिरा गांधी ने इस सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। यह सीट गांधी परिवार की विरासत बन गई।

 

1977 के चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1980 में इंदिरा गांधी ने रायबरेली से चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी की। उनकी असामयिक मृत्यु के बाद, उनके बेटे राजीव गांधी ने इस सीट से चुनाव लड़ा और जीता। यह सीट गांधी परिवार के लिए एक मजबूत गढ़ बन गई है।

 

 

 सोनिया गांधी की राजनीतिक विरासत

2004 में सोनिया गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने लगातार पांच बार इस सीट पर जीत हासिल की और 20 साल तक सांसद रहीं। सोनिया गांधी की उपस्थिति ने रायबरेली को कांग्रेस के लिए एक मजबूत गढ़ बनाए रखा।

 

 राहुल गांधी का रायबरेली से चुनाव लड़ना

राहुल गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, जो उनकी मां सोनिया गांधी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकेत है। उन्होंने वायनाड से भी चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, जिससे उनकी राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी।

 

 रायबरेली में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ मुकाबला

रायबरेली में भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह के खिलाफ मुकाबला कठिन हो सकता है। दिनेश प्रताप सिंह 2019 में सोनिया गांधी के खिलाफ लड़े थे और कांग्रेस को चुनौती दी थी। हालांकि, उन्होंने हार का सामना किया था। इस बार उनके लिए राहुल गांधी के खिलाफ लड़ना एक नई चुनौती होगी।

 

 राहुल गांधी के लिए रायबरेली में चुनौतियाँ

राहुल गांधी के लिए रायबरेली में चुनौतियाँ हैं, क्योंकि उनके सामने भाजपा की एक मजबूत प्रत्याशी खड़ी है। पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस के जीत के अंतर में कमी आई है, जिससे यह स्पष्ट है कि भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।

 

 

 राहुल गांधी के अमेठी छोड़ने के कारण:-

राहुल गांधी के अमेठी छोड़ने के कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं:

– घटता जनाधार: अमेठी में पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत घट रहा था। 2019 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

– विपक्ष की मजबूत मौजूदगी: भाजपा की स्मृति ईरानी ने अमेठी में कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी थी, जिससे राहुल गांधी के लिए अमेठी में जीत हासिल करना कठिन हो गया था।

– नए क्षेत्रों में विस्तार: राहुल गांधी के लिए रायबरेली और वायनाड से चुनाव लड़ने का निर्णय कांग्रेस को नए क्षेत्रों में विस्तार का अवसर प्रदान करता है।

 

 रायबरेली में राहुल गांधी की स्थिति

राहुल गांधी के लिए रायबरेली में चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह गांधी परिवार की पारंपरिक सीट है। उन्होंने इस सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, जिससे उनके समर्थकों में उत्साह है। हालांकि, उनके सामने भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ लड़ाई चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

 

 राहुल गांधी के रायबरेली चुनाव के संभावित परिणाम

राहुल गांधी के रायबरेली से चुनाव लड़ने के परिणामों के बारे में अनुमान लगाना कठिन है। हालांकि, गांधी परिवार की इस सीट पर मजबूत पकड़ के कारण, उनके पास जीतने की संभावना अधिक हो सकती है। यदि राहुल गांधी रायबरेली से जीत हासिल करते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ी जीत होगी।

 

 निष्कर्ष

राहुल गांधी के रायबरेली से चुनाव लड़ने का निर्णय कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह गांधी परिवार की पारंपरिक सीट है, और उनके लिए यह चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है। हालांकि, उनके सामने चुनौतीपूर्ण मुकाबला है, लेकिन उनके समर्थकों में उम्मीद है कि वे इस चुनाव में सफल होंगे।

 

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